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गोवर्धन पूजा के फायदे

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#क्या_हैं_गोवर्धन_पूजा कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन उत्सव मनाया जाता है। इस दिन बलि पूजा, अन्न कूट, मार्गपाली आदि उत्सव भी सम्पन्न होते है। अन्नकूट या गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारम्भ हुई। दिवाली की अगली सुबह गोवर्धन पूजा की जाती है। लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गायों की पूजा की जाती है। गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है। देवी लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती हैं उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं। गौ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ही कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन की पूजा की जाती है और इसके प्रतीक के रूप में गाय की पूजा की जाती है।   गोवर्धन पूजा सही है या गलत  आओ विचार करें  जिस समय कृष्ण जी मथुरा में रहते थे तब उन्होने अपने गांव में अन्य देवी देवताओ की पूजा बंद करवा दी इस बात से देवताओं का राजा इंद्र नाराज हो गया और उसने मथुरा को डूबोने के लिये भारी वर्षा कर दी।  तब कृष्ण जी ने अपनी उँगली पर गोवर्...

कावड़ यात्रा -

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क्या है कांवड़ यात्रा? किसी पावन तीर्थ जैसे हरिद्वार से कंधे पर गंगाजल लेकर आने और अपने घर के नजदीक भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों पर चढ़ाने की परंपरा ‘कांवड़ यात्रा’ कहलाती है। सावन में भगवान महादेव की और भक्तों के बीच की दूरी कम हो जाती है। इसलिए भगवान को प्रसन्न कर मनोवांछित फल पाने के लिए कई उपायों में एक उपाय कांवड़ यात्रा भी है, इसे शिव को प्रसन्न करने का सहज मार्ग माना गया है। बता दें कि सावन माह में कांवड़ में जल भरकर शिवलिंग या ज्योतिर्लिंग पर चढ़ाने की मान्यता है। कहा जाता है कि शिव जी ने सावन माह में ही विषपान किया था। इसलिए उस विष की ज्वाला को शांत करने के लिए जलाभिषेक करने का विधान बना। माना जाता है कि कांवड़ के जल से शिव जी का जलाभिषेक करने से जीवन की तमाम समस्याएं दूर होती हैं। मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का डर भी समाप्त हो जाता है। कांवड़ यात्रा – शास्त्रविरूद्ध साधना हमारे शास्त्रों में मनुष्य जीवन को अति दुर्लभ बताया है। मनुष्य जीवन पाकर मानव भक्ति नहीं करता वह जीवन को बर्बाद करता है। वर्तमान में हिन्दू धर्म में जितनी भी भक्ति पूजा साधना चल रही है वास्तविकत...

मानव वास्तव में कौन

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अनादि काल से ही मानव परम शांति, सुख व अमृत्व की खोज में लगा हुआ है। वह अपने सामर्थ्य सामर्थ्य के अनुसार प्रयत्न करता आ रहा है लेकिन उसकी यह चाहत कभी पूर्ण नहीं हो पा रही है। ऐसा इसलिए है कि उसे इस चाहत को प्राप्त करने के मार्ग का पूर्ण ज्ञान नहीं है। सभी प्राणी चाहते हैं कि कोई कार्य न करना पड़े, खाने को स्वादिष्ट भोजन मिले, पहनने को सुन्दर वस्त्र मिलें, रहने को आलीशान भवन हों, घूमने के लिए सुन्दर पार्क हों, मनोरंजन करने के लिए मधुर-2 संगीत हों, नांचे-गांए, खेलें-कूदें, मौज-मस्ती मनांए और कभी बीमार न हों, कभी बूढ़े न हों और कभी मृत्यु न होवे आदि-2, परंतु जिस संसार में हम रह रहे हैं यहां न तो ऐसा कहीं पर नजर आता है और न ही ऐसा संभव है। क्योंकि यह लोक नाशवान है, इस लोक की हर वस्तु भी नाशवान है और इस लोक का राजा ब्रह्म काल है जो एक लाख मानव सूक्ष्म शरीर खाता है। उसने सब प्राणियों को कर्म-भर्म व पाप-पुण्य रूपी जाल में उलझा कर तीन लोक के पिंजरे में कैद किए हुए है। कबीर साहेब कहते हैं कि :--              कबीर, तीन लोक पिंजरा भया, पाप पुण्य दो जाल।   ...

मोक्ष प्राप्त

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  मुक्ति पाना आसान है या मुश्किल मुक्ति पाना आसान है लेकिन हमारे सभी धर्मगुरुओं ने जनता को मनमानी साधना तथा शास्त्र विरुद्ध साधना करवाने के कारण मुक्ति को पाना मुश्किल बना दिया। इसलिए जनता नास्तिकता की ओर बढ़ती जा रही हैं। और कहीं मनुष्य अंधश्रद्धा भक्ति की ओर  किसी भी प्रभु में आस्था करके उसे प्राप्ति की तड़फ में पूजा में लीन हो जाना। फिर अपनी साधना से हटकर शास्त्रा प्रमाणित भक्ति को भी स्वीकार न करना। दूसरे शब्दों में प्रभु भक्ति में अंधविश्वास को ही आधार मानना। जो ज्ञान शास्त्रों के अनुसार नहीं होता, उसको सुन-सुनाकर उसी के आधार से साधना करते रहना। वह साधना जो शास्त्रों के विपरीत है, बहुत हानिकारक है। अनमोल मानव जीवन नष्ट हो जाता है। जो साधना शास्त्रों में प्रमाणित नहीं है, उसे करना तो ऐसा है जैसे आत्महत्या कर ली हो। आत्म हत्या करना महापाप है। इसमें अनमोल मानव जीवन नष्ट हो जाता है। इसी प्रकार शास्त्राविधि को त्यागकर मनमाना आचरण करना यानि अज्ञान अंधकार के कारण अंध श्रद्धा के आधार से भक्ति करने वाले का अनमोल मानव (स्त्रा-पुरूष का) जीवन नष्ट हो जाता है क्योंकि पवित्रा श्रीमद्भग...

Bible

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ईसाई धर्म में पूर्ण परमात्मा बाइबल के अनुसार बाइबिल ने स्पष्ट किया है कि प्रभु का नाम कबीर है।  पवित्र सद ग्रंथों में प्रमाण है कि परमेश्वर कभी किसी मां से जन्म नहीं लेता। लेकिन यीशु ने मरियम के गर्भ से जन्म लिया ।यह सुने इससे यह प्रमाणित होता है की यीशु परमेश्वर नहीं है। जगत का तारणहार कोई और है। भगवान ने मनुष्य को शाकाहारी भोजन खाने के आदेश दिये हैं - पवित्र बाइबल पवित्र बाइबल में उत्पत्ति 1:29 पर फिर परमेश्वर ने कहा सुनो जितने बीज वाले छोटे छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर है और जितने वृक्षों में बीज वाले फल होते हैं वे सब मेंने तुम को दिए हैं वह तुम्हारे भोजन के लिए हैं। और जितने पृथ्वी के पशु, और आकाश के पक्षी, और पृथ्वी पर रेंगने वाले जन्तु हैं, जिन में जीवन के प्राण हैं, उन सब के खाने के लिये मैं ने सब हरे हरे छोटे पेड़ दिए हैं; और वैसा ही हो गया। गरीब, जीव हिंसा जो करते हैं, या आगे क्या पाप। कंटक जुनी जिहान में, सिंह भेडि़या और सांप।। जो जीव हिंसा करते हैं उससे बड़ा पाप नहीं है। जीव हत्या करने वाले वे करोड़ो जन्म शेर, भेड़िया और साँप के पाते हैं। एक तरफ तो ...

संपूर्ण सृष्टि नायक

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 'शेखतकी ने जुल्म गुजारे, बावन करी बदमाशी' शेखतकी ने ईष्या वश  कबीर साहेब को मारने के लिए 52 प्रकार से हत्या करने का षड्यंत्र रचा । जिसे बावन कसनी कहते हैं। वह हर बार असफल रहा ।क्योंकि अविनाशी का नाश करने में कोई सक्षम नहीं। यदि आम संत होते तो मारे जाते। कबीर साहिब पूर्णब्रह्म है, सर्वशक्तिमान परमात्मा है। उनका एक तत्व का नूरी अमर शरीर है। सृष्टि के रचनहार है।  मृत गाय को जीवित करने की परीक्षा -     एक बार दिल्ली के राजा सिकंदर लोदी ने एक गर्भवती गाय को तलवार से काट दिया । तब राजा ने कहा  की कबीर, यदि तू खुदा है तो इस गाय को जीवित कर दे। साहेब कबीर ने उसी समय आशीर्वाद देकर  मरी गाय को जीवित कर दिया तथा दूध की बाल्टी भर दी और कहा -  ़    गऊअपनी अम्मा है इस पर छुरी  न बाह।  गरीबदास घी  दूध को, सब ही आत्म खाह।।   👉अधिक जानकारी के लिए देखें हमारी इस वेबसाइट को👇👇👇👇 www.jagatgururampalji.org

कबीर साहेब पूर्ण परमात्मा

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कबीर परमेश्वर चारों युगों में प्रकट होते हैं तथा अपने सत्य ज्ञान का प्रचार करते हैं सतयुग में सत सुकृत नाम से प्रकट होते हैं और द्वापर युग में करुणामई नाम से प्रकट होते हैं त्रेता युग में मुनींद्र नाम से प्रकट होते हैं तथा कलयुग में वास्तविक नाम  कबीर प्रभु के नाम से प्रकट होते हैं। आज इस वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज कबीर साहेब के रूप में प्रकट हो चुके हैं वेदों अनुसार सर्व सृष्टि रचनहार कबीर परमात्मा हैं ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 90 मंत्र 3 इस मंत्र में बताया गया है कि वह पूर्ण ब्रह्म कविर्देव तो परब्रह्म से भी बड़ा है अर्थात् सर्वशक्तिमान है तथा सर्व ब्रह्मण्ड उसी के अंश मात्र पर ठहरे हैं।  अधिक जानकारी के लिए देखें  इस वेबसाइट को http://www.jagatgururampalji.org