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मोक्ष प्राप्त

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  मुक्ति पाना आसान है या मुश्किल मुक्ति पाना आसान है लेकिन हमारे सभी धर्मगुरुओं ने जनता को मनमानी साधना तथा शास्त्र विरुद्ध साधना करवाने के कारण मुक्ति को पाना मुश्किल बना दिया। इसलिए जनता नास्तिकता की ओर बढ़ती जा रही हैं। और कहीं मनुष्य अंधश्रद्धा भक्ति की ओर  किसी भी प्रभु में आस्था करके उसे प्राप्ति की तड़फ में पूजा में लीन हो जाना। फिर अपनी साधना से हटकर शास्त्रा प्रमाणित भक्ति को भी स्वीकार न करना। दूसरे शब्दों में प्रभु भक्ति में अंधविश्वास को ही आधार मानना। जो ज्ञान शास्त्रों के अनुसार नहीं होता, उसको सुन-सुनाकर उसी के आधार से साधना करते रहना। वह साधना जो शास्त्रों के विपरीत है, बहुत हानिकारक है। अनमोल मानव जीवन नष्ट हो जाता है। जो साधना शास्त्रों में प्रमाणित नहीं है, उसे करना तो ऐसा है जैसे आत्महत्या कर ली हो। आत्म हत्या करना महापाप है। इसमें अनमोल मानव जीवन नष्ट हो जाता है। इसी प्रकार शास्त्राविधि को त्यागकर मनमाना आचरण करना यानि अज्ञान अंधकार के कारण अंध श्रद्धा के आधार से भक्ति करने वाले का अनमोल मानव (स्त्रा-पुरूष का) जीवन नष्ट हो जाता है क्योंकि पवित्रा श्रीमद्भग...

Bible

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ईसाई धर्म में पूर्ण परमात्मा बाइबल के अनुसार बाइबिल ने स्पष्ट किया है कि प्रभु का नाम कबीर है।  पवित्र सद ग्रंथों में प्रमाण है कि परमेश्वर कभी किसी मां से जन्म नहीं लेता। लेकिन यीशु ने मरियम के गर्भ से जन्म लिया ।यह सुने इससे यह प्रमाणित होता है की यीशु परमेश्वर नहीं है। जगत का तारणहार कोई और है। भगवान ने मनुष्य को शाकाहारी भोजन खाने के आदेश दिये हैं - पवित्र बाइबल पवित्र बाइबल में उत्पत्ति 1:29 पर फिर परमेश्वर ने कहा सुनो जितने बीज वाले छोटे छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर है और जितने वृक्षों में बीज वाले फल होते हैं वे सब मेंने तुम को दिए हैं वह तुम्हारे भोजन के लिए हैं। और जितने पृथ्वी के पशु, और आकाश के पक्षी, और पृथ्वी पर रेंगने वाले जन्तु हैं, जिन में जीवन के प्राण हैं, उन सब के खाने के लिये मैं ने सब हरे हरे छोटे पेड़ दिए हैं; और वैसा ही हो गया। गरीब, जीव हिंसा जो करते हैं, या आगे क्या पाप। कंटक जुनी जिहान में, सिंह भेडि़या और सांप।। जो जीव हिंसा करते हैं उससे बड़ा पाप नहीं है। जीव हत्या करने वाले वे करोड़ो जन्म शेर, भेड़िया और साँप के पाते हैं। एक तरफ तो ...