मोक्ष प्राप्त

 मुक्ति पाना आसान है या मुश्किल

मुक्ति पाना आसान है लेकिन हमारे सभी धर्मगुरुओं ने जनता को मनमानी साधना तथा शास्त्र विरुद्ध साधना करवाने के कारण मुक्ति को पाना मुश्किल बना दिया। इसलिए जनता नास्तिकता की ओर बढ़ती जा रही हैं।
और कहीं मनुष्य अंधश्रद्धा भक्ति की ओर
 किसी भी प्रभु में आस्था करके उसे प्राप्ति की तड़फ में पूजा में लीन हो जाना। फिर अपनी साधना से हटकर शास्त्रा प्रमाणित भक्ति को भी स्वीकार न करना। दूसरे शब्दों में प्रभु भक्ति
में अंधविश्वास को ही आधार मानना। जो ज्ञान शास्त्रों के अनुसार नहीं होता,
उसको सुन-सुनाकर उसी के आधार से साधना करते रहना। वह साधना जो
शास्त्रों के विपरीत है, बहुत हानिकारक है। अनमोल मानव जीवन नष्ट हो जाता
है। जो साधना शास्त्रों में प्रमाणित नहीं है, उसे करना तो ऐसा है जैसे आत्महत्या
कर ली हो। आत्म हत्या करना महापाप है। इसमें अनमोल मानव जीवन नष्ट हो
जाता है।
इसी प्रकार शास्त्राविधि को त्यागकर मनमाना आचरण करना यानि
अज्ञान अंधकार के कारण अंध श्रद्धा के आधार से भक्ति करने वाले का अनमोल
मानव (स्त्रा-पुरूष का) जीवन नष्ट हो जाता है क्योंकि पवित्रा श्रीमद्भगवत गीता
अध्याय 16 श्लोक 23 में बताया है कि :-
जो साधक शास्त्राविधि को त्यागकर अपनी इच्छा से मनमाना आचरण
करता है यानि किसी को देखकर या किसी के कहने से भक्ति साधना करता है
तो उसको न तो कोई सुख प्राप्त होता है, न कोई सिद्धि यानि भक्ति की शक्ति
प्राप्त होती है, न उसकी गति होती है। (गीता अध्याय 16 श्लोक 23)
इन्हीं तीन लाभों के लिए साधक साधना करता है जो मनमानी शास्त्रा
विरूद्ध साधना से नहीं मिलते। इसलिए अंध श्रद्धा को त्यागकर अपने शास्त्रों में
वर्णित भक्ति करो।
मुक्ति को पाना आसान है-
एक रस परम शांति व सुख है। जब तक हम सतलोक में नहीं
जाएंगे तब तक हम परमशांति, सुख व अमृत्व को प्राप्त नहीं कर सकते। सतलोक में जाना तभी संभव है जब हम पूर्ण संत से उपदेश लेकर पूर्ण परमात्मा की आजीवन भक्ति
करते रहें। इस पुस्तक ‘‘ज्ञान गंगा’’ के माध्यम से जो हम संदेश देना चाहते हैं उसमें
किसी देवी-देवता व धर्म की बुराई न करके सर्व पवित्रा धर्म ग्रंथों में छुपे गूढ रहस्य को
उजागर करके यथार्थ भक्ति मार्ग बताना चाहा है जो कि वर्तमान के सर्व संत, महंत व
आचार्य गुरु साहेबान शास्त्रों में छिपे गूढ रहस्य को समझ नहीं पाए। परम पूज्य कबीर
साहेब अपनी वाणी में कहते हैं कि - ‘वेद कतेब झूठे ना भाई, झूठे हैं सो समझे नांही।
जिस कारण भक्त समाज को अपार हानि हो रही है। सब अपने अनुमान से व झूठे
गुरुओं द्वारा बताई गई शास्त्रा विरूद्ध साधना करते हैं। जिससे न मानसिक शांति
मिलती है और न ही शारीरिक सुख, न ही घर व कारोबार में लाभ होता है और न ही
परमेश्वर का साक्षात्कार होता है और न ही मोक्ष प्राप्ति होती है। 
यह सब सुख कैसे मिले तथा यह जानने के लिए कि मैं कौन हूं, कहां से आया हूं, क्यों जन्म लेता हूं, क्यों
मरता हूं और क्यों दुःख भोगता हूं ? आखिर यह सब कौन करवा रहा है और परमेश्वर
कौन है, कैसा है, कहां है तथा कैसे मिलेगा और ब्रह्मा, विष्णु और शिव के माता-पिता
कौन हैं और किस प्रकार से काल ब्रह्म की जेल से छुटकारा पाकर अपने निज घर सतलोक में वापस जा सकते हैं।
मनुष्य जीवन का मुख्य उदेश्य मोक्ष प्राप्ति है -

पूर्ण सतगुरु रामपाल जी महाराज

ये मनुष्य जीवन हमे पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब की भक्ति करने के लिए प्राप्त हुआ है। इस मनुष्य का एक मात्र उदेश्य मोक्ष की प्राप्ति है। सर्व पवित्र ग्रन्थों का सार येही है की एक पूर्ण संत से नाम दीक्षा प्राप्त कर के इस जनम मृत्यु के रोग से मुक्ति पानी चाहिए। पूर्ण संत की यह पहचान है की वो तीन नाम तीन चरण में देता है और उसको ये नाम दान देने की अनुमति होती है।

सतगुरु रामपाल जी महाराज विश्व में एक मात्र संत हैं जो की अपने शिष्यो को सत्नाम दे कर मोक्ष की प्राप्ति करवा सकते हैं।
अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखें  इस वेबसाइट को 👇👇
http://www.jagatgururampalji.org

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