भारत का पुनरुत्थान

भारत की वर्तमान स्थिति-

आधुनिक युग में आज का मानव  चोरी, व्यभिचार, सीना-जोरी, निर्लज्जता, छल -कपट व लड़ाई _झगड़े अशांति! मनुष्य में हिंदू -मुस्लिम दंगा, भेद-भाव दहेज प्रथा नशा आदि व्याप्त है।
 भ्रष्टाचार की चक्की चाली, मुंह चिकना पेट खाली ।
 दुखी है हर इंसान, शिष्टाचार का नहीं नामोनिशान।
 भूल गया भगवान ,
मानव हो गया अभिमान। हुआ मानवता का पतन, हुआ मानव जीवन रत्न।
ऐसी स्थिति में वैयक्तिक - चेतना का जो रूप उभरा वह राजनैतिक दृष्टि से उग्र तथा सामाजिक ... है कि पुरातन सब कुछ त्याग देना चाहता है या इतना अन्तर्मुखी हो गया है कि अपने ही दुःखों ... वर्तमान के महत्त्व को ही स्वीकार करने के कारण कबीर , सूर , तुलसी की आदर्शवादिता आज लड़खड़ा गई है । ( घ ) पुनरुत्थान युग भारतीय पुनरुत्थान का समय नवीन क्रांति , नवीन चेतना का समय था ।
सर्व मानव समाज से प्रार्थना करते हैं कि पूर्ण संत रामपाल जी महाराज को पहचानो तथा अपना व अपने परिवार का कल्याण करवाओ । अपने रिश्तेदारों तथा दोस्तों को भी बताओ तथा पूर्ण मोक्ष पाओ।  स्वर्ण युग प्रारंभ हो चुका है। लाखो पुण्य आत्माएं संत रामपाल जी तत्वदर्शी संत को पहचान कर सत्य भक्ति कर रहे हैं, वे अति सुखी हो गए हैं। सर्व विकार छोड़कर निर्मल जीवन जी रहे हैं।
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